Thursday, April 16, 2020

Seedhi...

जाने छत कहाँ हैं........ 

इक सीढ़ी और साल चढ़ गया........ 

........ जाने कहाँ छत ज़िंदगी से दूर गया

आँगन की दरख़्त पर लगी मैं सोचूँ ........ 
  
इंसा क्या है ?

मैं गर लकड़ी का टुकड़ा तो वह मिट्टी का पुतला हैं....... 

अलग ही कुछ नाता है वो मुझे काट बनाता हैं.......
   
मैं उसे चढ़ते - उतरते........ 

सुख - दुःख का दृश्य दिखता हूँ.........

पीढ़ी दर पीढ़ी यही हाल हैं......... 
  
चढ़ाई अच्छी लगती है जीवन में सिर्फ़ ऊँचाई 

सच्ची लगती हैं....... 

यौवन इन्हें प्यारा हैं होता ये पर पारा हैं....... 

चढ़े तो ख़रा सोना है उतरे तो ख़ारा पानी हैं........ 

सच से इसकी अभी भी दूरी हैं.......

जीवन मृत्यु इक दुजे बिन अधूरी हैं......... 
  
एक बस ईश्वर हैं.........

........ बाकि सब नश्वर हैं !!

Monday, April 13, 2020

Aye...khuda...


हर रूह में तू बसता है ...ऐ ख़ुदा ,फिर क्यों रूह से जिश्म होते है जुदा,


ढूँढा तुझे मंदिर ,मस्जिद के अंदर,....जब भी पाया खुदको बीच समंदर !!                                 

                                  आयत का हर लब्ज़,याद मुझे ज़ुबानी हैं !                                

                                 फुर्सत में बैठ कभी,तुझे भी अपनी सुनानी हैं !!


माना फ़रयादी की भीड़ बहुत है,सबको अपनी  प्यास बहुत है,


एक सी यहाँ जिंदगानी है,ज़ख्मों से ज्यादा गहरे घाव की कहानी हैं !!


तौफा दिया ज़िंदगी का तूने,जिसके कई पन्ने है अनकहे - अनसुने, 


ज़िंदगी तो है पर न वो रवानी है,जो सुना सकूं ना ऐसी कोई कहानी है !!


               "नाज़ तुझपे फिर भी ज़िंदगानी है,..समझते -समझते तुझे गुज़र जानी हैं "


Sunday, April 12, 2020

Saarthi....jeevan ka


                                          "Tu hi sathi..aur saarthi bhi.."


Jab bhi zindgi ke haadso se hataash hua.....teri aazmaish se niraash hua...,

Dhunda tujhe...har sahar, har mandir ,har dar per...tujhse pahle lambi line ka shikar hua...,

Itne roop dekhe tere.... aur kitne naamo se do chaar hua .....,

Kahi tu Ram aur.....kahi tu Hanuman hua..,

Aakhe thi num aur band....jab baithe the dar par tere..... darshan ko hum..,

Ek pal ko yeh ahsaash hua....tu kuch kah raha.....dil ko yeh mahsush hua..,

" Tu kyu dhundh mujhe...ho rahi  paresan..,mein har kan mein hoon....har jan mein hoon..,

bahar nahi.... tere ander hoon...jisse tu hai anjaan..,aur nahak hi kar rahi...paresan..,

Darr mat mujhse...,prem ke siwa nahi chahiye kuch tujhse...

Sabhi ke jeevan ka mein hi toh aadhar hoon....,tu mujhse hai...mein tujhse hoon...,

Mein hi toh sarvatra sansar  hoon..,

Sirf , Arjun  ka hi  nahi...,tere bhi har yudh ka mein hi toh..... sathi aur saarthi hoon..,"





O kanha...


ओ  कान्हा.......,


जानें क्या सूझी तुझको....प्रीत क्यों जगाई मुझको,


तू भी तो तरपा होगा..... राधे दर्शन को तरसा होगा !


मन बनाकर..... कई दफ़े ख़ुद पर बरसा होगा !!


देख छवि आँखों में तेरी.... छलके आँसू पलकों से मेरी,


सुध - बुध सबने खोई...... सुन बाँसुरी की धुन तेरी !!


राधा तेरी जया है..... मीरा अदभुत माया की काया है,


जोगन से जग करे सवाल..... बता तेरा जहां में कौन है ?


मुस्कुरा कर आज भी...... कुंज बिहारी खड़े क्यों मौन हैं !!


जग से न अब आशा है..... बदल गयी प्रेम की परिभाषा है,


देखो तो लगता है...... हर तरफ़ चारों धाम लगे हैं ! 


श्याम दिल में नहीं..... ईट की दीवारों में क़ैद घनश्याम पड़े है !!

Mere Ram.....


उगते सूरज की, किरणों में तू ,
आरंभ भी तू......अंत भी तू  

सुख में भूल, दर्द में जाना जिसे,
नित जग, जिसका नाम भजे,
कहते हैं सब राम उसे........,

तू है गगन से, पाताल तक, 
जीवन थमा, तेरे हि आधार पर,
परचम तेरा, क्षितिज के पार तक,
तू है अल्प से अल्पविराम तक........, 

तेरे इशारे बिन, कुछ चला नहीं, 
धूप छाँव में भी, ढला नही,  
वो सत्य कैसा ?
जिसमें तेरा नाम नहीं........., 

सतरंगी ये दुनियाँ, अपनी आँखें खोले,
हल्की मुस्कान जब, तेरे अधरों को घेरे,
बुझे तारे भी जाग उठे, फ़न जब शेषनाग खोले,
सारा जग जय श्री राम बोले........,

तुलसी कहे........ दूजा न अब कोई राम होगा, 
जिसका अवध में, इतना नाम होगा,
हृदये में लगा, जिसके धाम होगा, 
वहीं बसा श्री राम होगा............., 


Tu Chal To Sahiii...


सोचा जो है हो जाए गर, चाहा जो मिल जाये गर,

मुश्किल है सब्र की डगर, दिन बदलने में भी लगता है पहर,

माना राहें आसान नहीं, मुमक़िन हर मुक़ाम नहीं,

थकने दे राहों को,....  तू मत कर आराम कहीं,

तू चल तो सही......,

समंदर सि इस सुनामी में, लहरों से न भाग तू ,

साहिल की चाह में, अपने वजुद को न हार तू ,

अँधेरों को चीरती, बन रौशनी की मिसाल तू ,

चाहे बदलनी पड़े तुझे,..... ज़िंदगी में पतवार कई,

तू चल तो सही......,

कुछ गर पाने की आस है, तो सीख लक्ष्य साधना,

हौसले के तीर से, ज़िद अपनी भेदना,

मायूस न हो खुद से, ख़ास हर प्रयास कर,

मिले शिकस्त तो क्या, खुद से और बेहतर सवाल कर,

उठे सवालों का हल,..... आसां हो मुमक़िन नहीं,

तू चल तो सही......,

फँसा है तू कुरुक्षेत्र में, कब तक बचेगा गिद्ध के नेत्र से ,

अपना मनोबल एकत्र कर , योद्धा बन युद्ध कर ,

अंत का पता नहीं,.... हर वार खाली हो ये भी मुमक़िन नहीं ,
  
तू चल तो सही......,

                              ज़िंदगी से जुंग जारी है.........जख्मों पर रोना लाचारी है !!


Naari....jeevan ek sangharsh...


Women's Day यानि "8 March" एक औरत के विस्तृत
रूप का चिंतन करने का दिन उसके 365 दिन और 24 *7 घंटे
चलने वाले काम का बातों से देने वाले  Reward दिन  🙏

"इक बात कहूँ गर सच मानों तुम...साल,घंटे,दिन को छोड़ो 
इक पल काट सको बिन इनके.....तो जानें हम"



हर पिता कहे, ...... तू जान हमारी हैं,

औरों के लिए ज़िम्मेदारी,.....पर तू हमारी दुलारी हैं !!

माना नया ज़माना है,.....  नए रिश्तों का.... नया पैमाना है,

जिसका कोई मोल नहीं,..... वो अनमोल तू खज़ाना हैं,
  
ख़ुदको आज़मा मत,..... अपने हित के लिए.....तुझे ही लड़ना है !!

अकेली राहों में संभल कर,...... ख़ुद के बल चलना है, 

किसी और के लिए नहीं,.....पहले ख़ुद के लिए जीना हैं !!

वक़्त की आँधी में धूल उड़ेंगे,..... तेरी आँखों में,

उलझ न इन,..... भूल भरी धूल में.... हिम्मत के छीटों से तो 

....... तेरी बरसों की यारी हैं !!

रब ने इस फ़ितरत से,.... ढाला तुम्हें,....मौन बगिया में,

फूल खिलाने का...... जिम्मा दे..... डाला तुम्हेँ  !!

तू हि इस सृष्टि की जननी है,...... मान तेरा इस धरा पे भी भारी है ........ शान से कह कि तू नारी हैं !!

Hosla rakh.....


चल पड़े हो जिस सफर पर....... क़ायम तू..... हौसला रख,

राहों में कहीं सहरा.....कहीं पे समंदर भी आयेंगे, 

कभी न कभी लहरें तुम्हें.....साहिल पर छोड़ जायेंगे !!

खुले आसमां से.....तू डर मत.....पर् तो मिले है तुझे, 

उड़ान को ऊंची..... साहस भी आ जायेंगे !!

पेड़ है....पतझड़ तो आएंगे....रिश्तें है तो कुछ

सर इल्ज़ाम भी लायेंगे.....संयम संग चले तो सब 

निपट जायेंगे !!

मंज़िल की प्यास न छोड़...... होड़ में तू न दौड़, 

आज है जो थमा थमा सा.... कल की बारिश में 

चल निकलेगा वो  !! 

रूप - रंग नहीं..... अपनी सोच की थोड़ी चाल 

बदल......मिजाज़ ख़ुद बदल जायेंगे ,

मरहम का पता हो तो......ज़ख़्म भी सूख जायेंगे  !!