Sunday, April 12, 2020

O kanha...


ओ  कान्हा.......,


जानें क्या सूझी तुझको....प्रीत क्यों जगाई मुझको,


तू भी तो तरपा होगा..... राधे दर्शन को तरसा होगा !


मन बनाकर..... कई दफ़े ख़ुद पर बरसा होगा !!


देख छवि आँखों में तेरी.... छलके आँसू पलकों से मेरी,


सुध - बुध सबने खोई...... सुन बाँसुरी की धुन तेरी !!


राधा तेरी जया है..... मीरा अदभुत माया की काया है,


जोगन से जग करे सवाल..... बता तेरा जहां में कौन है ?


मुस्कुरा कर आज भी...... कुंज बिहारी खड़े क्यों मौन हैं !!


जग से न अब आशा है..... बदल गयी प्रेम की परिभाषा है,


देखो तो लगता है...... हर तरफ़ चारों धाम लगे हैं ! 


श्याम दिल में नहीं..... ईट की दीवारों में क़ैद घनश्याम पड़े है !!

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